युवा विकास की नई दिशाएँ

गत कुछ वर्षों में भारत की विश्व में एक नई पहचान बन रही है| विश्व के सबसे युवा देश के रुप में आज भारत जाना जाने लगा है| अभी हाल ही में हमने अपना ६८ वाँ गणतंत्र दिवस मनाया| आज़ाद भारत की आयु भले ही सत्तर साल के “सीनियर सिटीजन” जितनी  हुई हो, मगर मैं गर्व से यह कह सकता हूँ की साल दर साल धैर्य, विचार और साहस के मापदंडों पर देश अधिक से अधिक युवा और परिणामस्वरूप अधिक से अधिक सक्षम बनता जा रहा है| देश की आबादी का लगभग पचास फीसदी हिस्सा उन युवाओं का है जो कुछ नया सीखकर, नए क्षेत्रों, नए व्यवसायों और नए अवसरों का उचित प्रयोग करते हुए देश की उन्नति में अपना योगदान देने की क्षमता रखते हैं और यदि इस युवाशक्ति को सही दिशा दी जाए तो वो दिन ज्यादा दूर नहीं जब भारत “विकसनशील” देशों की सूची से निकलकर “विकसित” राष्ट्रों के श्रेणी में अपना स्थान बनाए|

युवा विकास से राष्ट्र विकास के इसी सूत्र को अपना ध्येय मानते हुए हमारी नैशनल युवा कोऑपरेटीव सोसायटी(एन.वाय.सी.एस) भी अपना मार्गक्रमण कर रही है| मगर समुचित विकास के लिए युवाओं को कुशल व्यावसायिक और तकनिकी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, खेल प्रशिक्षण और अच्छे अर्थ सहाय्य से उद्यमशीलता के मार्ग उपलब्ध कराने होंगे जिनपर चलकर यह युवा वर्ग ना केवल अपना बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र का विकास करने में समर्थ बनेगा| एन.वाय.सी.एस उन्हें ऐसे सभी मौकों से अवगत कराने का प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध है जिससे की उनकी जिंदगी में सुधार आ सके|

हमने कौशल विकास के राजमार्ग को अपनाते हुए देश के कई कोनों में कोविदा स्किल सेंटर्स प्रस्थापित करने का प्रयत्न किया है जिससे की नई टेक्नोलॉजी, नए जॉब रोल्स, नए क्षेत्र और नई पद्धति से शिक्षा के द्वार युवाओं के लिए खोले जा सकें| जनवरी में कश्मीर की घाटी के खोनमोह जिले में एन.वाय.सी.एस कोविदा ने अपना स्कील सेंटर स्थापित किया है| देश का हर युवा हमारा अपना  है और सभी को अपना भविष्य सँवारने का मौका मिलना ही चाहिए ऐसा विश्वास हम रखते हैं| प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना के साथ जुड़ते हुए हम “कुशल भारत” के निर्माण में सहयोग करना अपना दायित्व समझते हैं| महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर “कौशल्य सेतू” कार्यक्रम का भी क्रियान्वयन शुरु हो चूका है|

मगर भारत तभी समर्थ बनेगा जब भारत स्वस्थ रहेगा| “सवस्थ भारत का साँझा प्रयास, निरामयता का दृढ़ विश्वास” अपने इस विश्वास को सार्थ करते हुए एन.वाय.सी.एस प्रधान मंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के साथ भी “इम्प्लीमेंटेशन पार्टनर” के रुप में जुड रहा  है| इससे ना केवल समाज में सभी को कम दामों में अच्छी दवाईयाँ मुहैय्या कराई जाएँगी मगर इससे युवाओं को ऐसे जनऔषधि केंद्र खोलकर रोजगार का नया साधन निर्माण करने का अवसर भी मिलेगा | उद्यम विकास के हमारे सूत्र से इस योजना के ताने बाने भी अधिक सशक्त किए जा सकते हैं|

देश का मात्र विकास ही नहीं परंतु पूरे जगत में देश कि गरिमा को ऊँचा करना का जो बीड़ा एन.वाय.सी.एस ने उठाया है उस अभिनव कार्यक्रम एन.वाय.सी.एस गेल रफ्तार का दूसरा सीज़न भी अपने अंतिम चरण पर पहुँच चूका है| युवाओं के साथ साथ बढती उम्र के बच्चों को प्रशिक्षण देकर ऑलंपिक में भारत के लिए एथलेटिक मेडल जीतकर उसकी गरिमा बढ़ाने का हमारा सपना गेल इंडिया की साँझेदारी, विश्वास और समर्थन के कारण ही वास्तविकता के इतने करीब पहुँच सका है| एन.वाय.सी.एस के सभी सदस्य, चयनकर्ता, कार्यकर्ता, समर्थक एवं जिला और राज्य प्रतिनिधियों के अथक परिश्रम ही कि वजह से हम देश के कोने कोने से अद्भुत प्रतिभा की खोज कर पाए हैं| मुझे उम्मीद ही नहीं पूरा विशवास है कि ये बच्चे भारत देश का पर्चम ऑलंपिक खेलों के आसमान में ऊँचा लहराएँगे|

देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर क्षेत्र में इस भावी पीढ़ी में निवेश करना केवल हमारा कर्तव्य नहीं, ध्येयवाद है| गेल रफ्तार सीज़न टू में मैं सभी बच्चों, उनके प्रशिक्षकों, और परिजनों को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि उन्होंने हमारे विश्वास को बल देकर और भारत की गरिमा के इस सफर में हमारा साथ दिया है| जय भारत, जय हिंद|