अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह- एक दृष्टिक्षेप - राजेश पांडे


प्रतिवर्ष १४ नवंबर से २० नवंबर तक मनाया जाने वाला अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह, भारतीय सहकारी संस्थाओं का नव राष्ट्र निर्माण हेतु किए गए योगदान की संतुष्टि का जश्न है | क्योंकि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु सहकारिता को प्रजातंत्र का आधारस्तंभ मानते थे, यह सप्ताह आधुनिक भारत के इसी शिल्पकार के जन्मदिवस के उपलक्ष में शुरू होता है | साल दर साल इस सप्ताह ने विश्व के सबसे बड़े सहकारी आंदोलन का रुप धारण कर लिया है और छह सात लाख से भी अधिक सहकारी संस्थाएँ इस सप्ताह में जुडती जा रही हैं | इन सभी के लिए यह सप्ताह अपनी उन्नति,विपत्ति और उपलब्धियों की समीक्षा और विश्लेषण करने का अच्छा अवसर है|

इस सहकारी-सप्ताह के दौरान सहकारी आंदोलन के मूलभूत सिद्धांतों, नेतृत्व विकास, सहकारी दर्शन और जन कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी जन जन तक पहुँचाई गईं | ६३ वें सप्ताह का मुख्य विचार बिंदु "सतत विकास और संवृद्धि में सहकारिता की भूमिका" रहा|

सहकारिता विभाग शासन के अन्य विभागों से भिन्न होकर, एक नियामक एवं सहकारी आंदोलन में कार्यरत संस्थाओं को प्रोत्साहित करने वाला विकास विभाग है| सहकार-सप्ताह के तहत प्रति दिन शासन एवं सहकारी संस्थाओं द्वारा कई विषयों का जायजा लिया गया | अपने अपने स्तर पर कई संस्थाओं ने अपने सदस्यों एवं सामान्य जनता के लिए भी खुली कार्यशालाओं के आयोजन का मानस पूरा किया जिससे कि सहकारिता का महत्व, उसका प्रयोजन और विकास सातत्य बनाए रखने में उसकी भूमिका लोगों तक पहुँचाई जा सके | इस प्रकार के विचार मंथन से राष्ट्र व्यवस्था एवं अर्थ व्यवस्था की त्रुटियाँ हमारे सम्मुख आ सकती हैं जिनपर सुधार किया जा सके | मुझे यह देश के युवा को राष्ट्र के मुख्य प्रवाह में लाने का एक अच्छा तरीका प्रतीत होता है |

किसी समान उद्द्येश्य कि प्राप्ति हेतु किए गए मिले जुले प्रयास को कहा जाता है सहकार (co-operation) और भारत का सहकारी आंदोलन या कोऑपरेटिव मुव्हमेंट इसके स्वाधीनता संग्राम से भी अधिक पुराना है| परंतु पुराने समय में साम्यवाद (communism) और स्वतंत्रता मिलते ही उभरने वाला पूंजीवाद (capitalism) दोनों ने ही देश में अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी| पिछले कुछ दशकों में सहकारिता (cooperative) के मध्य प्रवाह से राष्ट्र विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है| आज के बदलते दौर में सहकारिता केवल आर्थिक विकास तक ही सिमित नहीं रही है बल्कि आर्थिक विकास के साथ साथ समाज कल्याण, व्यक्ति विकास एवं सांस्कृतिक विकास का दायित्व भी यह सहकारी समितियाँ ले रही हैं| सर्वेक्षण(survey) के आँकड़े कहते हैं की वर्तमान दिवस में देश भर में पाँच लाख से भी अधिक सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं और करोडों लोगों के लिए रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं|


 यह सप्ताह सभी सहकारी संस्थाओं को आपस में एक सहकार सेतु बनाने में प्रेरक रहेगा | सप्ताह की रुपरेखा में हर एक दिन एक महत्वपूर्ण विषय की जनजागृति को समर्पित रहा| शिक्षण और प्रशिक्षण के माध्यम से सहकारिता का सशक्तिकरण, सहकारिता के माध्यम से कौशल एवं उद्यमिता का विकास, सहकारिता के माध्यम से वित्तीय समावेशन, सहकारिता के माध्यम से सरकारी फ्लैगशिप योजनाओं एवं कार्यक्रमों का क्रियान्वयन, सहकारिता द्वारा प्रौद्योगिकी का अभिग्रहण, सहकारिता के माध्यम से युवाओं, महिलाओं तथा कमजोर वर्ग का सशक्तिकरण एवं सहकारिता के माध्यम से गुड गवर्नेंस , मूल्य तथा नेतृत्व कार्यक्रम जैसे विषय इस सप्ताह में मुख्य थे | नैशनल युवा कोऑपरेटिव सोसायटी (एन.वाय.सी.एस) में हम यह मानते हैं कि इन सात दिनों में सात वैचारिक भूमिकाओं पर चिंतन करने का मौका हमें मिला और यही चिंतन आनेवाले दिनों के हमारे पथ प्रदर्शन में सहायक होगा |

२६ राज्यों में ३८२ से भी अधिक जिलों में एन.वाय.सी.एस कार्यरत है| इतनी बड़ी व्याप्ति वाला विश्व में शायद जी कोई युवा कोऑपरेटिव होगा| एन.वाय.सी.एस अपनी तरह का एकमेव अग्रणी युवा कोऑपरेटिव है| “सहकारिता के माध्यम से कौशल एवं उद्यमिता का विकास” यह विषय हमारे अंतरंग के अधिक समीप है क्योंकि अपनी “कोविदा” परियोजना द्वारा हम इसी क्षेत्र में सक्रीय हैं | एन.वाय.सी.एस समर्थ युवा शक्ती से राष्ट्र को समर्थ बनाने में विश्वास रखती है| साल २०२० तक देश की ६४% लोकसंख्या युवा वर्ग से होगी और यही देश का कार्यबल(work force) होगा| “कोविदा” के माध्यम से हम युवाओं में कौशल विकास और उद्यमता के बीज अंकुरित करना चाहते हैं जिससे की युवा अपने भविष्य के साथ साथ राष्ट्र का भविष्य भी संवर सकें| प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना अंतर्गत नैशनल स्किल डेव्हलपमेंट कोर्पोरेशन के सहयोग से एन.वाय.सी.एस ५ केंद्रों में कौशल विकास प्रशिक्षण का कार्य कर रही है| एन.वाय.सी.एस की लघु वित्त या माइक्रोफाईनांस से संबंधित “जन निधी” योजना “सहकारिता के माध्यम से वित्तीय समावेशन” के ध्येय से ही प्रभारित है और पिछले तेरह सालों से उद्यम विकास हेतु युवाओं को व्यवसाय पूँजी का संवितरण कर रही है| आज तक की इसकी कार्यव्याप्ति में १५००० से भी अधिक परिवार इसकी लघु वित्त योजनाओं का तथा निवेश योजनाओं का लाभ उठा चुके हैं|

जो कार्य एक व्यक्ति अकेले नहीं कर सकता उसे सामुदायिक रुप से करना अधिक लाभदायक होता है| स्वराज के प्रारंभिक काल में देश का विकास बहुत मंद गती से हो रहा था अत एव सभी पंच वार्षिक योजनाओं में सहकारिता को महत्व दिया गया है| सहकारिता एक सफल और सुफल कल की पहल है|भारत में डेअरी कोऑपरेटिव, एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव, कोऑपरेटिव बैंकिंग, शुगर कोऑपरेटिव, हाऊसिंग कोऑपरेटिव आदि क्षेत्रों में कई सहकारी संस्थाएँ कार्यरत हैं| विदेश में सहकारिता की व्याप्ति कई क्षेत्रों में हो रही है और भारत में भी एन.वाय.सी.एस कौशल विकास जैसे ही दूसरे भी अभिनव(innovative) एवं परिवर्तनात्मक क्षेत्रों में भी कार्य करने का मानस रखती है| कोऑपरेटिव टूरीझम, हेल्थ कोऑपरेटिव, इलेक्ट्रिकल कोऑपरेटिव बोर्ड आदि दिशाओं में हम अवश्य कार्य करने का प्रयास करेंगे | इस सहकार-सप्ताह की वजह से सहकारिता का समर्थन और प्रवर्तन देश की जनता में होगा ऐसी आशा मैं रखता हूँ और आप अभी को इस सहकारी आंदोलन में सहायक होने का आवाहन करता हूँ|